 غزل
عندليب دير
زما نظر زما په حال نشته
په دې خبره کې جنجال نشته
ستا د يادونو په وريځو کې هم
چرته يو څاڅکے د وصال نشته
ما وې منګے مې چرته اونه ليده
چا وې ګودر چا وې کلال نشته
چې استقبال ي په ماتم نه کووم
زما په ژوند کې داسې کال نشته
ظالم مې څله له اسمانه ولی
زما د کور خو يو ديوال نشته
هلته مې وران شو د مټۍ ګلونه
دلته د توت په ښاخ کې ټال نشته
ما مې شړۍ په وجود ټينګه نه کړه
ځکه په سر باندې ستا شال نشته
اوس چې دا خپل سټوکے تش ګرځووم
اوس دې مشکڼې په رومال نشته
زه که په سر باندې دستار نه لرم
ستا هم په زنه باندې خال نشته
تاوده حالات ورله قلم لمسوی
په عندليب کې هيڅ کمال نشته د همدې برخې نورې ليكنې -----------------------------------------------------------------------------------
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aliakbar
DA KALEE SHATHALAN PAKH SHAWE DE -----------------------------------------------------------------------------------
andaleeb
malgaria za da thiro saloro kalono na musafir yam. kho zay dartha na khayam wali chi thatha kha patha da....................................andaleeb -----------------------------------------------------------------------------------
Aliakbar
ANDALEEB SAIB NAN SABA CHARTHA YI -----------------------------------------------------------------------------------
تبصره
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